नई दिल्ली। लोकतंत्र के सबसे बड़े पर्व यानी लोकसभा चुनाव में जीत-हार तो होते रहती हैं लेकिन जीत और हार की संख्या पर लोगों की नजर रहती हंै. सबसे बड़ी और सबसे छोटी जीत पर हमेशा चर्चा होती है. क्या कभी आपने सोचा है कि लोकसभा चुनाव के इतिहास में सबसे बड़ी जीत किसके नाम दर्ज है. आप कहेंगे कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की. लेकिन नहीं श्री मोदी की नहीं. बल्कि ये जीत है माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के अनिल बसु की.
जी हां, माकपा के इस प्रत्याशी ने 2004 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी को 5,92,502 के रिकॉर्ड मतों से हरा दिया था. 2014 में हुए चुनाव नरेंद्र मोदी वडोदरा से 5,70, 128 मतों से जीते थे. वे श्री बसु के रिकॉर्ड के करीब तक पहुंच गए थे लेकिन तोड़ नहीं पाए. बाद में उन्होंने वड़ोदरा की सीट छोड़ दी थी और वाराणसी से ही प्रधानमंत्री बने. पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के नाम भी एक आम चुनाव में रिकॉर्ड मतों से जीतने का रिकॉर्ड है. उन्होंने 1984 में हुए आम चुनाव में उत्तर प्रदेश की अमेठी सीट से अपनी निकटतम प्रत्याशई मेनका गांधी को 3,14,878 मतों से हराया था. रामविलास पासवान के नाम भी ऐसा रिकॉर्ड दर्ज जो शायद कोई नेता कभी तोड़ पाए. वे एकलौते ऐसे प्रत्याशी हैं जो दो आम चुनावों में सर्वाधिक मतों के अंतर से जीतने वाले नेता हैं. उन्होंने 1977 में हाजीपुर सीट 4,24,545 और 1989 में 5,04,448 के अंतर से जीती थी.



