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बेमेतरा के पिरदा में छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना ने खोला मोर्चा, प्रशासन फैक्ट्री मालिक के खिलाफ़ एफ आई आर से बच क्यों रहा?

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बेमेतरा 28मई 2024। पिरदा बारूद फैक्ट्री ब्लॉस्ट मामला लगातार उलझता जा रहा है. बेमेतरा ज़िला के पिरदा गाँव के बारूद फैक्ट्री में ब्लॉस्ट होने के दो दिन बाद भी छत्तीसगढ़ सरकार और ज़िला प्रशासन ने न ही मृतकों की संख्या बताई और न ही घायलों की जानकारी दी है । अब तक प्राप्त जानकारी के मुताबिक़ फैक्ट्री में 400 मजदूर तीन ठेकेदारों के अंदर काम करते हैं लेकिन इनमें से कितने मजदूर घटना के समय फैक्ट्री में मौजूद थे इसकी जानकारी छुपाई जा रही है क्योकि एंट्री रजिस्टर और सीसीटीवी के डेटा के साथ छेड़छाड़ की गई है।

कितने टी एन टी की क्षमता का विस्फोट था जिससे 10 किलोमीटर के रेडियस के निवासियों को जमीन हिलती हुई महसूस हुई इसका खुलासा सरकार को अब तक कर देना था, सेना के विस्फोटक विशेषज्ञओ के आने के दो दिन बाद भी इसकी घोषणा नही की गयी है. इस तरह के जमीन हिला देने वाले विस्फोट का एक मतलब क्षमता से बहुत ज्यादा बारूद का संग्रहण भी हो सकता है.

पुलिस क्या उद्योगपतियों के दबाव में है –
पिरदा बारूद फैक्ट्री ब्लॉस्ट मामला: छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना घटना के दिन शनिवार से ही फैक्ट्री के सामने आंदोलनरत है और यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक प्रत्येक हताहतों को 50 लाख रुपए मुआवजा और परिवार के सदस्यों को सरकारी नौकरी नहीं मिल जाती है । छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना के प्रदेश अध्यक्ष डॉ अजय यादव ने छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा घोषित पाँच लाख रुपए के मुआवजे को हास्यास्पद बताया। उन्होने कहा कि छत्तीसगढ़िया के जान की क़ीमत सरकार ने पाँच लाख लगाई है जो हम छत्तीसगढ़ियों के साथ किए जा रहे दोयम दर्जे के व्यवहार को दिखाता है । घटना के 48 घंटों बाद बेमेतरा के कलेक्टर और पुलिस प्रशासन ने अमित बघेल के साथ बैठक कर ग्रामीणों की मांगो को पूछा जरूर हैं लेकिन अभी तक प्रशासन द्वारा ग्रामीणों की मांगो को मानी नहीं गई. दूसरी ओर रायपुर के कुछ  विश्वस्त सूत्र  फैक्ट्री मालिक के मध्यप्रदेश के वरिष्ठ भाजपा नेताओं के परिवार से होने का दावा कर रहे हैं जिसके कारण इस घटना में सरकार का रवैया कार्यवाही के नाम पर सुस्त दिखाई दे रहा है. यदि ऐसा कुछ नही है तो सम्बंधित उद्योगपति परिवार  को स्वयं सामने आ कर वस्तुस्थिति का खुलासा कर देना चाहिये.

आखरी उम्मीद डी एन ए जाँच से ही शिनाख्त की रह गयी है, ऐसे में परिजनों तथा ग्रामीणों का नाराज होना स्वाभाविक है. ग्रामीणों का कहना है कि विस्फोट से चिथड़े उड़े जिस्मोँ को समेट कर ले जाने वाला प्रशासन यदि पहले कंपनी की कारगुजारियों पर पाबंदी रखता तो ऐसा हादसा ही नही होता.

पिरदा बारूद फैक्ट्री ब्लॉस्ट मामला  अब  ग्रामीणों की ओर से सामाजिक से राजनितिक ताकत के रूप में  स्थान बना रही छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना के मज़बूत केडर ने सम्हाल लिया है उस ने पिरदा गाँव के आठ मृतक मज़दूरों को फ़ेक्ट्री गेट के सामने श्रद्धांजलि दिया और छत्तीसगढ़ सरकार को चेतावनी देते हुए कहा है कि तत्काल फैक्ट्री को पूर्णतः सील किया जाये। फैक्ट्री मालिक और प्रबंधन को गिरफ़्तार किया जाये। प्रत्येक मृतक एवं घायलों को 50 लाख रुपए मुआवजा दिया जाए और प्रत्येक मृतक के परिवार जन को सरकारी नौकरी प्रदान किया जाए। सरकार द्वारा ग्रामीणों की माँगे नहीं मानने पर शांतिपूर्ण आंदोलन के बजाय प्रदेशभर के हज़ारो सेनानी उग्र आंदोलन करेंगे ।

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