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शाकिर अली ने किताबों से बना रिश्ता कभी नही तोड़ा 1972 से 2021 तक बिखरा है उनका रचना संसार

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बिलासपुर , जनवादी लेखक संघ बिलासपुर द्वारा लेखक, कवि, समीक्षक स्व. शाकिर अली पर केंद्रित कार्यक्रम 14 अक्टूबर को बिलासपुर में सम्पन्न हुआ। बिलासपुर के मित्रों परिजनों , बैंक यूनियन के साथियों के अलावा देश प्रदेश से आये अनेक साहित्यकारों ने उन्हें इस अवसर पर याद किया।
इस कार्यक्रम में शामिल होने नई दिल्ली से जनवादी लेखक संघ के राष्ट्रीय महासचिव संजीव कुमार बिलासपुर पहुँचे, उन्होंने शाकिर अली की चिंताओं और सामाजिक सरोकार को उल्लेखनीय बताया। आज जनता की चेतना को समृद्ध करने वाले लोग धीरे धीरे कम होते जा रहे हैं छत्तीसगढ़ के शाकिर अली की पुस्तक आलोचना का लोकधर्म में उठाये गए मुद्दों पर विस्तार से बात की।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे सुपरिचित कथाकार शीतेन्द्र नाथ चौधुरी ने शाकिर अली के कहानियों और कविताओं के मर्म को समझाते हुए उनके व्यक्तित्व के विविध पहलुओं को रेखांकित किया।

भोपाल से आये प्रख्यात विचारक एवं समीक्षक रामप्रकाश त्रिपाठी ने शाकिर अली की आलोचना कर्म में स्थानीय अज्ञात कुलशील के ऐसे रचनाकारों को प्रोत्साहित किये जाने को महत्वपूर्ण बताया जिनकी रचनात्मकता के बावजूद राष्ट्रीय स्तर पर कोई खास पहचान नही थी। रायपुर से आये पत्रकार तथा लेखक पी सी रथ ने ग्रामीण बैंक कर्मी के रूप में दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में कार्य के बावजूद साहित्यिक कार्यक्रमों के प्रति उनकी सजगता का जिक्र किया। भिलाई के चर्चित कवि नासिर अहमद सिकंदर ने शाकिर की बस्तर पर लिखी गयी कविताओं को अनमोल बताया, उनका कहना था कि जिस दृष्टि से अपने आसपास के गांव समाज को शाकिर देखते थे वह उनकी रचनाओं में झलकता रहा है। जगदलपुर के सूत्र पत्रिका के संपादक विजय सिंह ने उनकी 4 दशक की रचनाओं में बस्तर पर लिखी कविताओं को श्रेष्ठ बताया।
कहा कि रायपुर के ज्यादातर स्तरीय कार्यक्रमों में वे भागीदारी किया करते थे।
बिलासपुर के सामाजिक कार्यकर्ता नंद कश्यप ने शाकिर अली की समकालीन मुद्दों पर गहरी समझ और सजगता को याद करते हुए बिलासपुर में उनकी कमी का जिक्र किया।
प्रगतिशील लेखक संघ के अशोक शिरोडे ने शाकिर अली की खूबियों की बात करते हुए उनके निरंतर अध्ययनशील होने तथा नई किताबों को पढ़ते रहने को याद किया। गुरु घासीदास केंद्रीय विवि से आये मुरली मनोहर सिंह ने शाकिर अली की किताबों के आधार पर उनके लेखन के विषयों को रेखांकित किया।


इसी तरह बिलासपुर तथा विभिन्न स्थानों से आये रचनाकारों, बुद्धिजीवियों तथा बैंक कर्मियों ने बेहद आत्मीयता से शाकिर अली को याद करते हुए उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि दी। कार्यक्रम में रायपुर से आये संजय पराते, नंदन,भिलाई से राकेश बॉम्बार्डि, मुमताज,जगदलपुर से विजय सिंह, बिलासपुर से नंद कश्यप,असीम तिवारी,ए एम मेमन, अरुण दाभड़ कर एस चट्टोपाध्याय, रवि बनर्जी, महेश श्रीवास, राजेश शर्मा, छत्रपाल वर्मा,ए के भार्गव, विनोद कुमार शुक्ला, सैयद आमीर अली, रुहिना अली, विजय कुमार वर्मा, मधुकर गोरख, सी के खाण्डे, सुखाऊ निषाद, साधु साहू, डॉ जी डी पटेल पुष्कर, अंजना बंजारे, वंदना चेरियन, स्वाति वर्मा, राममिलन डे, गणेश रजक, हरीश पांडल, दुर्गा प्रसाद, घनश्याम रजक, टेकचंद, गौरव गुलहरे, नीलोत्पल शुक्ला, सुरेंद्र वर्मा, अतुल कुमार, अखिलेश गुप्ता, कोरबा से भास्कर चौधरी आदि उपस्थित थे।

कार्यक्रम का संचालन बिलासपुर जनवादी लेखक संघ के शौकत अली ने किया। कार्यक्रम के अंत मे इप्टा बिलासपुर के रंगकर्मी मोहम्मद रफ़ीक ने कवि शैलेन्द्र के जनगीत ‘ तू जिंदा है तो जिंदगी की जीत पर यकीन कर’ का गायन किया।

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